लिथियम और यूरेनियम

भविष्य में यूरेनियम के भंडार से अधिक लिथियम के भंडार का महत्व होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह विश्व के अधिकांश शहरों में चल रही गाड़ियों का ई-व्हीकल्स के रूप में बदलना होगा। विश्व के लिए खास ये भी है कि जहां यूरेनियम के भंडारण और इसके खनन की सीमा को तय किया जा सकता है वहीं लिथियम के लिए ऐसा कोई मानक तय नहीं है। इसका एक अर्थ यह है कि इसका अधिक मात्रा में खनन और भंडारण संभव है। इसलिए जिस देश के पास जितना अधिक लिथियम का भंडार होगा उसकी उन्नति भी उतनी ही तेजी से होगी। लेटिन अमेरिका लिथियम भंडार के मामले में सबसे आगे है। यहां से विश्व का कुल 53 प्रतिशत लिथियम मौजूद है।

 2022 के आंकड़ों के अनुसार लेटिन अमेरिकी देश चिली में लिथियम का सबसे बड़ा भंडार है। वहां यह करीब 93 लाख मिट्रिक टन है। इसके बाद आस्ट्रेलिया का नंबर आता है जिसके पास करीब 62 लाख मिट्रिक टन भंडार है। तीसरे नंबर पर अर्जेंटीना 27 लाख मिट्रिक टन, चौथे पर चीन दो लाख मिट्रिक टन, पांचवें पर अमेरिका एक लाख मिट्रिक टन, छठे पर कनाडा 93 हजार मिट्रिक टन, सातवें पर जिंबाव्बे 31 हजार मिट्रिक टन, आठवें पर ब्राजील 25 हजार मिट्रिक टन नौवें पर पुर्तगाल 60 हजार मिट्रिक टन है। 

कुछ समय पहले ही भारत के जम्मू कश्मीर में लिथियम के बड़े भंडार का पता चला है। राज्य के रियासी जिले में लिथियम का करीब 59 लाख टन भंडार होने की बात कही गई है। इसके बाद लिथियम भंडार के मामले में भारत विश्व में तीसरे नंबर पर आ गया है। यह दुनिया की बेहद पतला, मजबूत और उपयोगी धातु है जिसे सफेद सोना भी कहा जाता है। हालांकि भारत में मिला लिथियम अभी शुरुआती अवस्था में है। इसके खनन और इसकी बैट्री बनाने के बीच का सफर काफी लंबा होता है। अभी तक भारत अपनी जरूरत का करीब 70 प्रतिशत लिथियम आयात करता है। भारत में 90 प्रतिशत लिथियम बैट्रीज चीन से आयात की जाती हैं। 

2019 के वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि लिथियम का सबसे अधिक करीब 65 प्रतिशत इस्तेमाल बैट्री बनाने में ही किया गया था। इसके बाद सिरेमिक्स एंड ग्लास, लूब्रिकेंट्स ग्रीस आदि में हुआ। लिथियम भंडार के मामले में चीन विश्व में भले ही चौथे नंबर पर है लेकिन फिर भी वह इसके दम पर विश्व पर राज करने के सपने तक देखने लगा है। हालांकि 2022 में आस्ट्रेलिया इसके खनन के मामले में विश्व में सबसे अव्वल था। वर्ष 2022 में उसने 61 हजार मिट्रिक टन लिथियम का खनन किया था। भारत यदि अपने यहां मौजूद लिथियम का सही उपयोग कर सका तो वह न सिर्फ इस मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा बल्कि वह विश्व की एक बड़ी शक्ति भी होगा। 


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