Happines Index-2023 बना मजाक

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की संस्था गैलोप ने विश्व के देशों का हैप्पीनेस इंडेक्स 2023 जारी किया है। इस इंडेक्स को जारी करने के बाद से विशेषकर भारत में इस बात को लेकर बहस चल रही है कि इसमें भारत को सभी पड़ोसी देश, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के नीचे स्थान मिला है। सवाल उठ रहा है कि यह कैसे संभव है कि जब भारत इन सभी देशों से बेहतर है तो इस इंडेक्स में इन देशों के नीचे कैसे हो सकता है, वो भी तब जबकि श्रीलंका, बदलाह हो चुका है और पाकिस्तान भी दिवालिया होने की कगार पर है। नेपाल की तुलना भारत से करना भी गलत होगा। बांग्लादेश की स्थिति इन सभी में ठीक जरूर है लेकिन भारत से बेहतर वो भी नहीं है। फिर ऐसा क्यों है कि इस सूची में शामिल 137 देशों में भारत को 127वां स्थान मिला है। इस सूची में अफगानिस्तान को दुनिया का सबसे खराब देश बताया गया है। भारत के बाद इस लिस्ट में जिन देशों का नाम शामिल है उनमें से अधिकतर अफ्रीका महाद्वीप के हैं, एक पश्चिम एशिया का है। यह सभी देश वो हैं जहां पर गरीबी-अशांति और गृह युद्ध की स्थिति है। ऐसे में कुछ सवालों का उठना और इसका जवाब पाना जरूरी हो जाता है।

आगे बढ़ने से पहले यहां पर यह बताना जरूरी हो जाता है कि इस लिस्ट में भारत के पड़ोसी देश किस स्थान पर हैं। बांग्लादेश 118वें स्थान पर, मयांमार 117वें स्थान पर, श्रीलंका 112वें स्थान पर, पाकिस्तान 108वें स्थान पर, नेपाल 78वें स्थान पर, चीन 64वें नंबर पर है। इस लिस्ट में भूटान का नाम शामिल नहीं है। हैप्पीनेस इंडेक्स में देशों को जिस आधार पर सूचीबद्ध किया गया है, उसके छह पैमाने हैं, जिनमें आय, स्वास्थ्य, जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय, सोशल सपोर्ट, जिसमें पूछा जाता है कि किसी आपात स्थिति में क्या आपकी मदद को कोई आएगा पूछा जाता है, हैल्दी लाइफ एक्सपेक्टेंसी, जीवन में अपनी पसंद का काम करने की आजादी, जिनीयसिटी जिसमें आपके द्वारा दिए गए दान के बारे में पूछा जाता है, भ्रष्टाचार को लेकर आपकी सोच के बारे में राय ली जाती है। यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर राय भारत में अलग-अलग हो सकती है। लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर, अपने पसंद का काम या दूसरी चीजें करने की स्वतंत्रता के मुद्दे पर, आपातकाल में किसी को मदद के लिए पुकारने के मुद्दे पर अधिकतर लोगों की राय एक समान हो सकती है। यह राय अधिकतर नेगेटिव ही होगी। 

इसके बावजूद कई सवाल इस रिपोर्ट को लेकर उठ रहे हैं। बता दें कि पिछले नौ वर्षों में देश में गरीबी 22 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आ गई है। गरीबी की दर भी आज 0.8 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। प्रति व्यक्ति आय के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार भी दोगुना हुआ है। देश में 6.53 लाख प्राथमिक स्कूलों का निर्माण हुआ है। वित्त वर्ष 2012-13 में देश में खाद्यान्न का जो उत्पादन 255 मिलियन टन था वह वित्त वर्ष 2021-22 में बढ़कर 317 मिलियन टन हो गया। कोविड से उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बाद भी विगत वित्त वर्ष में 418 अरब डालर का रिकार्ड निर्यात हुआ। भारत ने अपने सभी लोगों को कोरोना रोधी वैक्सीन लगाने के साथ ही दुनिया के करीब सौ देशों को वैक्सीन के साथ-साथ दवाइयों का मुफ्त वितरण भी किया। पिछले दो वर्षों में 3.40 लाख करोड़ रुपये की लागत से देश के लगभग 80 करोड़ लोगों तक जरूरी राशन पहुंचा है। 


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