चीन की उखड़ती सांसों से संकट में दुनिया


पूरी दुनिया नए साल के आगमन के जश्‍न की तैयारी कर रही है तो दूसरी तरफ चीन के जरिए विश्व में एक बार फिर से कोरोना महामारी की दहशत महसूस की जा रही है। चीन में एक ही दिन में साढ़े तीन करोड़ लोगों के इसकी चपेट में आने की खबरों से ये खतरा पहले से कहीं अधिक बड़ा नजर आ रहा है। ये खतरा केवल चीन तक इसलिए सीमित नहीं है क्योंकि चीन की जिस दवा को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं उसको चीन ने कई देशों में निर्यात किया था। ऐसे में उन देशों के लिए भी ये एक खतरे की घंटी है, जिन्होंने इसके जरिए अपने यहां पर कोरोना की जंग जीतने का या तो दावा किया या फिर वे उस पर अधिक निर्भर रहे। चीन की इस दवा पर उठ रहे सवाल भी केवल वहीं तक सीमित नहीं हैं। इस पर उठते सवाल कहीं न कहीं इसको मंजूरी देने वाली वैश्विक स्वास्थ्य संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन के फैसले पर भी उठ रहे हैं। कहा यहां तक जा रहा है चीन के मामले में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का लचर रवैया इसके लिए अधिक दोषी है।

सरकारी आंकड़ों पर एक नजर 
वैक्‍सीन के मामले में चीन के ही सरकारी आंकड़े इसकी एक तस्‍वीर भी पेश कर रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो चीन ने बाहरी दुनिया को अपनी बनाई वैक्‍सीन की करीब 1.853 बिलियन खुराक बेची हैं। इसके अलावा 328 मिलियन खुराक को दान के तौर पर विभिन्‍न देशों को दिया गया है और 1.653 बिलियन खुराक अब तक डिलीवर की जा चुकी हैं। चीन की सरकार की तरफ से जारी ये आंकड़े 21 दिसंबर 2022 तक के हैं। इनमें चीन की बनाई सिनोफार्म, कैनसीनो और सिनोवेक की वैक्‍सीन शामिल हैं। चीन भले ही अपनी वैक्‍सीन से अपने लोगों की जिंदगी बचाने में नाकाम साबित हो रहा है लेकिन अपनी वैक्‍सीन को कारगर बताते हुए उसने इन्‍हें आधी दुनिया को मुहैया करवाया है। आपको हैरानी होगी कि अफ्रीका महाद्वीप में केवल दक्षिण सूडान और दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर सभी देशों में चीन ने अपनी दवाओं को डिलीवर किया है। इसमें मोरक्‍को में सबसे अधिक करीब 45.5 मिलियन खुराक भेजी गई हैं। वहीं दक्षिण अमेरिका की बात करें तो यहां पर केवल पैराग्‍वे को छोड़कर समूचे महाद्वीप में चीन की विकसित दवा पहुंची है। इसमें ब्राजील में सबसे अधिक करीब 102 मिलियन से अधिक खुराक शामिल हैं। उत्‍तरी अमेरिका के मैक्सिको में चीन ने करीब 42.13 मिलियन खुराक से अधिक वैक्‍सीन मुहैया करवाई हैं। एशिया की बात करें तो ईरान में 114.05 मिलियन और पाकिस्‍तान में 111.43 मिलियन, म्‍यांमार में 56.34 मिलियन, बांग्‍लादेश में 41.49 मिलियन, वियतनाम में 41.5 मिलियन, कंबोडिया में 42.103 मिलियन, फिलीपींस में करीब 60 मिलियन से अधिक, इंडोनेशिया में करीब 268.27 मिलियन खुराक मुहैया करवाई गई हैं। चीन ने अपनी इस वैक्‍सीन डिप्‍लोमेसी का जो जाल बिछाया उसमें यूरोप के भी कुछ देश शामिल रहे। इनमें यूक्रेन, जहां चीन ने कोरोना वैक्‍सीन की करीब 6 मिलियन खुराक, बेलारूस 9.5 मिलियन खुराक, हंगरी करीब 4.5 मिलियन खुराक, बोसनिया हर्जीगोविनिया 1.13 मिलियन खुराक, अल्‍बानिया 1.34 मिलियन खुराक, उत्‍तरी मेसेडोनिया करीब 70 लाख खुराक, सर्बिया करीब 4.2 मिलियन खुराक, तुर्की करीब 31.4 मिलियन खुराक, मोल्‍डोवा करीब 25 लाख खुराक, जार्जिया 2.8 मिलियन खुराक, अर्मेनिया 90 लाख खुराक और अजरबेजान को करीब 50 लाख खुराक मुहैया करवाई हैं।

एक बड़ा सवाल
ऐसे में एक बड़ा सवाल ये भी उठना जरूरी है कि चीनी वैक्‍सीन के इस्‍तेमाल के बाद क्‍या इन सभी देशों में कोरोना का वही पुराना दौर वापस लौट आएगा। यदि ऐसा होता है तो ये वास्‍तव में पूरी दुनिया के लिए किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं होगा। चीन की वैक्‍सीन से जो देश पूरी तरह से दूर रहे उनमें कनाडा, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ, जापान, कोरिया महाद्वीप, वियतनाम, आस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड और भारत का नाम शामिल है। इन देशों का चीन की कोरोना वैक्‍सीन को नकारना इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि इन्‍हें इस पर कोई विश्‍वास नहीं था। वहीं, चीन की वैक्‍सीन पर सबसे अधिक निर्भर रहने वाले देशों की बात करें तो इसमें पाकिस्‍तान, जो कि उसका बड़ा सहयोगी है और हर वक्‍त चीन की तरफ मुंह ताकता दिखाई देता है, था। पाकिस्‍तान को इसके अलावा विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की गावी योजना के जरिए भी वैक्‍सीन हासिल हुई थीं। चीन की वैक्‍सीन ने जिस तरह से अपने यहां और दूसरे देशों में लोगों की सांसे अटकाने का काम किया है वो वास्‍तव में चिंता का विषय बनता जा रहा है। इतना ही नहीं ये खतरा जितना बड़ा हमें दिखाई दे रहा है उससे कहीं बड़ा जान पड़ता है। यहां पर ये भी बताना बेहद जरूरी है कि चीन में बनी सभी कोरोना वैक्‍सीन एमआरएनए तकनीक पर आधारित न होकर वहां की अपनी पद्धति पर आधारित हैं, जबकि विश्‍व की दूसरी कोरोना वैक्‍सीन एमआरएनए तकनीक पर ही आधारित हैं। इस तकनीक पर आधारित वैक्‍सीनों को विश्‍व स्‍तर पर मान्‍यता भी मिली है।

वक्त की जरूरत
विश्‍व को इस समस्‍या से समय रहते बाहर निकालने और निकलने के लिए बड़े पैमाने पर कवायद करने की जरूरत होगी। इसके लिए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन को भी तेजी से कदम उठाने होंगे और वहीं चीन को भी बिना देर गंवाए विश्‍व की दूसरी कोरोना वैक्‍सीन को अपने यहां पर इस्‍तेमाल की मंजूरी देनी होगी। हाल ही में जर्मनी ने चीन में मौजूद अपने नागरिकों को लगाने के लिए बायोएनटेक की वैक्‍सीन भेजी है। वहां पर करीब बीस हजार जर्मनी नागरिक हैं। वहीं जर्मनी में रह रहे चीनी नागरिकों को केवल चीन की बनाई वैक्‍सीन दी जाएगी। चीन का बढ़ता कोरोना संकट एशियाई देशों के लिए भी काफी बड़ा है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि वहां पर कई देशों के लाखों छात्र शिक्षा पा रहे हैं। कोरोना की पहली लहर के दौरान इनमें से कई छात्र अपने देशों को लौट गए थे, लेकिन बाद में ये छात्र वापस चले गए। 

वैरिएंट में फिर हो सकता है बदलाव
अब जबकि चीन में कोरोना विस्‍फोट हो गया है तो संभव है कि इनकी वापसी की राह फिर से खुल जाए और इनके जरिए कोरोना का खतरनाक वैरिएंट बीएफ-7 दूसरे देशों में घुसपैठ करने में सफल हो जाए। विश्‍व स्‍तर पर इस वैरिएंट को पहले सभी वैरिएंट से अधिक खतरनाक बताया जा रहा है। ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता है कि मौजूदा कोरोना वैक्‍सीन इस अमुक वैरिएंट पर कितना कारगर साबित होंगी। ऐसा इसलिए क्‍योंकि वैक्‍सीन को विकसित करने का आधार कोई अमुक वैरिएंट ही होता है। साधारण भाषा में यदि कहा जाए तो मौजूदा वैक्‍सीन उन्‍हीं वैरिएंट पर असरदार हैं जिनको आधार मानते हुए इन्‍हें विकसित किया गया है। ऐसे में चिंता का बढ़ना स्‍वाभाविक है। वैज्ञानिकों की मानें तो वो पहले ही इस बात की आशंका जता चुके थे कि बदलते समय में वायरस कई अन्‍य वैरिएंट के रूप में दुनिया के सामने आ सकता है। इस तरह से ये कहना कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी कि भविष्‍य में इस वायरस या इसके बदलते वैरिएंट से इंसान की जंग जारी रहे। इसके लिए मानवजाति को आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा।

संवेदनशील होने की जरूरत
वर्तमान की यदि बात करें तो इससे बचाव के लिए सरकार को ही नहीं बल्कि आम नागरिक को संवेदनशील होने की जरूरत अधिक है। आम आदमी इसके प्रति जागरुक रहते हुए अपना और दूसरों का बचाव बेहतर तरीके से कर सकता है। हमारे यहां पर सबसे गलत बात यही है कि हम हर चीज सरकार पर छोड़कर खुद हाथ बांधे बैठ जाते हैं। यही चलन हमारे लिए घातक साबित होता है। इस चलन को हम सभी को मिलकर खत्‍म करना होगा। सरकार कब क्‍या फैसला लेगी, इसको जाने बिना हमें आने वाले इस खतरे से निपटने के लिए खुद को तैयार करना होगा। मास्‍क पहनना, हाथों को कुछ अंतराल के बाद धोना, दूरी बनाकर रखना आदि सभी जरूरी उपायों को बिना किसी के कहे मानना होगा। इतना ही नहीं इंसान को यदि भविष्‍य में स्‍वस्‍थ रहना है तो इन सभी उपायों को अपने निजी जीवन में अपनाना ही होगा।  

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