धरती से 41 प्रकाश वर्ष दूर मिला एक नया एक्सोप्लानेट LHS475b

वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब टेलिस्कोप की मदद से डीप स्पेस में एक एक्सोप्लानेट खोज निकाला है। यह एक्सोप्लानेट धरती से करीब 40 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। नासा के इस टेलिस्कोप की मदद से पहली बार वैज्ञानिकों ने इस तरह के किसी एक्सोप्लानेट को खोजा है। वैज्ञानिकों की ये खोज इसलिए अधिक महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि वैज्ञानिक इसको धरती से काफी मिलता जुलता मान रहे हैं। आकार में ये प्लानेट काफी हद तक पृथ्वी की ही बराबर है। वैज्ञानिकों ने इस प्लानेट को LHS475b का नाम दिया है। फिलहाल वैज्ञानिक टेलिस्कोप से मिली जानकारी का विश्लेषण कर रहे हैं। शुरूआती जानकारी के मुताबिक वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इसका वातावरण काफी कुछ धरती से मिलता-जुलता हो सकता है। 

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के वेब टेलिस्कोप को नियर इंफ्रारेड स्पैक्टोग्राफ ने इसकी इमेज क्लिक की है। वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि ये एक राकी प्लानेट है और हमारे सोलर सिस्टम के बाहर ये प्लानेट स्थित है। अंतरिक्ष में मौजूद वेब टेलिस्कोप ही इतना कारगर है कि वो इसके वातावरण के बारे में वैज्ञानिकों को जानकारी दे सके। इसके वातावरण को लेकर वैज्ञानिक अबतक कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कह सके हैं, लेकिन टेलिस्कोप से मिली जानकारी के मुताबिक इस पर मालीक्यूल्स मिले हैं, जो इसके बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं। 

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस एक्सोप्लानेट का वातावरण मीथेन की मोटी चादर से बना है। ये काफी कुछ ऐसा ही है जैसा शनि ग्रह के चंद्रमा टाइटन का है। हालांकि वैज्ञानिक ये भी मान रहे हैं कि इस पर किसी तरह का कोई वातावरण नहीं है। वैज्ञानिक इसके वातावरण में कई अन्य गैसों के होने की संभावना से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। इसमें एक संभावना इसके वातावरण में कार्बनडाईआक्साइड के होने की भी जताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों को और अधिक समय चाहिए। वैज्ञानिकों को ये भी जानकारी मिली है कि ये धरती से कुछ अधिक गर्म है।

 इसके बादलों से मिली जानकारी के बाद इसको वीनस ग्रह के समान भी मान रहे हैं। वीनस का वातावरण भी कार्बनडाईआक्साइड से ही बना हुआ है। वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि ये प्लानेट अपनी ही धुरी पर एक चक्कर लगाने में दो दिन का समय लेता है। ये अपने तारे के काफी नजदीक है, जोकि लाल रंग को एक बौना तारा है। इसका तापमान सूर्य से कम है। इसको देखते हुए वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इस पर कोई वातावरण हो सकता है। ब्रह्मांड के ओक्टेन कांस्टलेशन में स्थित ये एक्सोप्लानेट को लेकर वैज्ञानिकों की एक टीम ने 11 जनवरी 2023 को एक प्रेस कांफ्रेंस भी की थी।   


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