पाकिस्तान: ट्रेनें बंद होने की कगार पर, महंगाई के आगे सरकार ने टेके घुटने

पाकिस्तान की खराब होती आर्थिक हालत अब वहां के लोगों के बीच आक्रोश को जन्म दे रही है। देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। सरकार के मुखिया देश को तरक्की की राह पर लाने के नाम पर यूएई की आधिकारिक यात्रा पर गए हैं। वहीं, देश में ट्रेनों का परिचालन बंद होने की कगार पर है, क्योंकि देश के पास इन्हें चलाने के लिए अब पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं बचा है। ऐसे में आने वाले दिनों में देश की अधिकतर ट्रेनों के पहिये था जाएंगे। देश में बढ़ती मुद्रास्फीति की दर से पहले ही देश का हाल काफी बुरा है। पिछले वर्ष आई ऐतिहासिक बाढ़ ने देश को पटरी से उतारने की जो राह तैयार की है, उससे खुद को बचाकर रख पाना पाकिस्तान और उसके हुक्मरानों को लिए आसान नहीं होगा। 

आटा, दाल, चीनी, दूध समेत दूसरी सभी चीजों के दामों में बेतहाशा तेजी होने के बावजूद ये लोगों को नहीं मिल पा रहे हैं। विश्व आर्थिक फोरम ने पाकिस्तान को लेकर चेतावनी दी है कि ये भुखमरी के खतरे का सामना कर रहा है। फोरम को यहां तक कहना है कि आने वाले दिनों में देश के हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि देश में मुद्रास्फीति की दर पिछले वर्ष नवंबर की तुलना में दिसंबर में बढ़कर 24 फीसद के पार हो गई है, वहीं खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी नवंबर 2022 की तुलना में दिसंबर में 35 फीसद से भी अधिक हो गई है। इसमें प्याज की कीमतों में करीम 415 फीसद, चाय में करीह 64 फीसद, गेहूं की कीमत में करीब 57 फीसद, अंडों की कीमत में करीब 54 फीसद, चावल की कीमत में 47 फीसद हो गई है। 

दालों की कीमतें भी सातवें आसमान पर जा पहुंची हैं। खुदरा बाजार में मसूर, मूंग, उड़द और चने की दाल की कीमतें 230 से लेकर 400 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो तक है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार बैंक संबंधित दस्तावेज को मंजूरी नहीं मिलने के कारण बंदरगाह पर आयातित खेपों की निकासी नहीं हो पा रही है। इससे दालों की कीमतों में जबरदस्त असर पड़ा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान हर वर्ष करीब 15 लाख टन दालों का आयात करता है। कराची किराना थोक विक्रेता संघ (केडब्ल्यूजीए) के मुताबिक गुरुवार को व्यापारियों ने को स्टेट बैंक के मुख्यालय के सामने प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने डालर की कमी के बहाने पिछले दो महीने से बंदरगाह पर दालों के 6,000 कंटेनरों को क्लीयरेंस नहीं दिए जाने का विरोध किया। 

वहीं दूसरी तरफ बैंक आयात दस्तावेज को स्वीकृति नहीं दे रहा है। एक दिसंबर को कीमत चना दाल का थोक मूल्य 170 प्रति किलो था, जो 1 जनवरी को बढ़कर 180 और अब यह 205 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो हो गया है। इसी तहर मसूर की कीमत 225 रुपये प्रति किलो है। खुदरा बाजार में मसूर 250 से 300 रुपये, मूंग 250 से 300 रुपये, उड़द 380 से 400 रुपये और चने की दाल 230 से 260 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। कहा जा रहा है कि जब तक बंदरगाह पर रखे कंटेनरों को क्लीयरेंस नहीं मिलेगा तबतक ये कीमतें यूं ही बढ़ती रहेंगी। 

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट में भी देश की खराब होती स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक मौसम संबंधी प्राकृतिक आपदा और आपूर्ति का बाधित होना लाखों लोगों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। देश पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्से अंधेरे में हैं। ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2023 में भी देश की खराब हालात के बारे में आशंका जताई गई है। इसमें यहां तक कहा गया है कि इस संकट के लिए सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही कारण जिम्मेदार हैं। देश की मीडिया में जलवायु परिवर्तन को लेकर भी लगातार चिंता जताई जा रही है। पिछले वर्ष ही पाकिस्तान ने अपने इतिहास की सबसे विनाशक बाढ़ का सामना किया था। इस बाढ़ से देश की आर्थिक स्थिति अधिक खराब हुई है। देश के जानकारों का कहना है कि राजनीतिक, आर्थिक संकट से शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म जोखिम बढ़ेंगे।  


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