पाकिस्तान ने भारत से संबंध सुधारने के लिए यूएई का सहारा लिया है। इसका खुलासा खुद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने अल अरेबिया चैनल को दिए इंटरव्यू में किया है। उनके इस इंटरव्यू की चर्चा पूरी दुनिया की मीडिया में हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह इस इंटरव्यू में उनसे भारत को लेकर पूछे गए सवाल और उनके जवाब हैं। इसमें उन्होंने अरबी भाषा में पूछे गए सवालों के जवाब विस्तार से अंग्रेजी में दिए है। इसी इंटरव्यू ैमें शहबाज ने कहा कि उन्होंने यूएई के प्रधानमंत्री और वहां के सुल्तान से भारत से संबंधों को सुधारने के लिए एक मध्यस्थ के रूप में सामने आने की पेशकश की है।
पाकिस्तान के पीएम ने इंटरव्यू में ये भी कहा कि पाकिस्तान के लिए यूएई किसी भाई की तरह है और भारत से भी दुबई के संबंध काफी बेहतर हैं। ऐसे में भारत से संबंध सुधारने में पाकिस्तान के लिए यूएई एक बेहतर जरिया हो सकता है। पीएम शहबाज ने ये इंटरव्यू कुछ दिन पहले ही अपने दुबई दौरे के दौरान दिया था। इसमें उन्होंने कश्मीर समेत सभी मुद्दों के बातचीत की मेज पर बैठकर सुलझाने की मंशा जताई है। हालांकि, इस इंटरव्यू और उनके यूएई दौरे की खास बात ये रही है कि दोनों देशों द्वारा दिए गए साझा डिक्लेयरेशन में कहीं भी कश्मीर शब्द का जिक्र नहीं किया गया है। इसलिए भी पीएम शहबाज के भारत के लेकर दिए बयान पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा शहबाज के इस इंटरव्यू के सामने आने के बाद पाकिस्तान की तरफ से जो ट्वीट किया गया उसमें ये साफ कर दिया गया है कि जब तक भारत कश्मीर से अनुच्छेद 370 को वापस लागू नहीं करता है तबतक पाकिस्तान भारत से कोई बातचीत नहीं करेगा।
पीएम शहबाज के इंटरव्यू के बाद सामने आई ये दोनों ही बातें ये बताने के लिए काफी हैं कि वो जिस बातचीत की बात इंटरव्यू में कर रहे थे, वो केवल दुनिया को और यूएई को धोखा देने तक ही सीमित थी। हकीकत ये है कि यदि पाकिस्तान भारत से संबंध सुधारने का इच्छुक है तो पीएम शहबाज शरीफ को यूएई का सहारा लेने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वो सीधे फोन पर भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी से बात कर सकते हैं। ऐसे में उनकी बात का भी वजन होगा और भारत को भी आगे कदम बढ़ाने में कोई ऐतराज नहीं होगा।
आपको बता दें कि जब पीएम मोदी अफगानिस्तान गए थे तब पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ ने उन्हें फोन कर अपनी नवासी की शादी में आने का न्योता दिया था, जिसको पीएम मोदी ठुकरा नहीं सके थे। इसलिए रिश्तों को सुधारने के लिए हर समय कूटनीति और किसी दूसरे माध्यम की दरकार नहीं होती है। इसका एक सीधा और सरल रास्ता हर समय खुला होता है। लेकिन पाकिस्तान के पीएम के हाथ हमेशा ही फौज द्वारा बंधे हुए होते हैं इसलिए ही चाहकर भी वहां का कोई भी नेता इस सीधे रास्ते पर चलने की गलती नहीं कर पाता है। जब नवाज ने इस तरह की गलती की थी, तब इसका खामियाजा उन्हें देश निकाला पाकर उठाना पड़ा था।
कूटनीति और राजनीति में धमकी और बातचीत भी एक साथ नहीं चल सकती है। जिस तरह से पीएम शहबाज ने परमाणु युद्ध को लेकर भारत को धमकी दी है उससे भी उनकी मंशा साफतौर जाहिर होती है कि वो ये बातें केवल अपनी छवि को बेहतर करने के लिए ही कर रहे हैं, जो फिलहाल मुमकिन दिखाई नहीं देती है।

Comments
Post a Comment