'कर्ज की पीते थे हम और कहते थे कि रंग लाएगी फाका ए मस्ती एक दिन'। गालिब का ये शेर इन दिनों पाकिस्तान और उसकी सरकार पर पूरी तरह से सही बैठता दिखाई दे रहा है। खाने को कुछ नहीं है लेकिन सरकार और नेताओं के शौक हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। पाकिस्तान से पिछले दिनों कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं जो किसी को भी ये सोचने पर मजबूर कर सकती हैं कि वहां की सरकार या नेताओं को वहां के लोगों की कितनी चिंता है।
खाने के लिए पाकिस्तान के पास पैसे नहीं हैं इसके बाद भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तुर्की पहुंच गए। उनकी ये यात्रा न तो वहां पर कोई राहत पहुंचाने के लिए थी न ही उन्हें आने के लिए कोई न्योता ही दिया गया था। पाकिस्तान के पीएमओ की तरफ से कहा गया कि शरीफ तुर्की में हाल ही में आए भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना देने वहां पहुंचे थे। पीएम शहबाज शरीफ के इस कदम को वहां की जनता से मजाक न कहे तो क्या कहें कि जहां देश में लोग भुखमरी के शिकार हो रहे हैं और सरकारी खजाना खाली है वहां के पीएम इस तरह से विदेश यात्रा कर पैसे को पानी की तरह बहाने में तनिक भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।
पाकिस्तान से आई एक और तस्वीर वहां की जनता के प्रति नेताओं की गंभीरता को बयान करने के लिए काफी है। इमरान खान की पीटीआई सरकार में गृह मंत्री रहे राशिद शेख जब दो सप्ताह के बाद जेल से बाहर आए तो उनके हाथों में कीमती सिगार देखकर कई लोगों को बड़ी हैरानी हुई। हैरानी इसलिए क्योंकि उन्होंने जेल से बाहर आते ही सिगार की मांग की थी और उनकी मांग को तुरंत पूरा भी कर दिया गया। एक तरफ देश के नेताओं के शौक में कोई कमी नहीं आ रही है तो वहीं दूसरी तरफ देश की जनता लगातार महंगाई की मार झेलने को मजबूर हो रही है। उसके पास दो वक्त की रोटी जुटाने के भी पैसे नहीं हैं और नेताओं के शौक खत्म नहीं हो रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान है कि मानता ही नहीं है।
एक तीसरी तस्वीर भी काफी दिलचस्प है। पाकिस्तान सरकार को वर्ल्ड बैंक ने कुछ समय पहले जो कर्ज देश की माली हालत सुधारने और दूसरे मदों में खर्च करने को दिया था अब उसी पैसे से सरकार सैकड़ों लग्जरी कारें खरीदने वाली है। पाकिस्तानी मीडिया की मानें तो इन पर सरकार 160 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है। यह कारें 3000 सीसी की हैं, जिन पर सरकार अपनी विलासिता के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने वाली है। सरकार की यह कवायद वहां की जनता के साथ कितना बड़ा मजाक है इसका अंदाजा वहां की जनता आसानी से लगा सकती है। पैसे की कमी की वजह से देश के बंदरगाहों पर पड़ी दालों के स्टाक को छुड़ाया नहीं जा सका है लेकिन पाकिस्तान के नेताओं को इसकी कोई चिंता नहीं है, वो केवल राजनीति कर देश की जनता को गुमराह करने में लगे हुए हैं।
पाकिस्तान से आई चौथी तस्वीर भी इस बात की पुष्टि करती है कि वहां के नेताओं को देश की जनता से नहीं बल्कि केवल अपनी तिजोरियां भरने से मतलब है। दरअसल सरकार ने ने डेढ़ सप्ताह के अंदर ही तेल और डीजल के दाम 72 रुपये तक बढ़ा कर देश की जनता को जोर का झटका दिया है। यह वृद्धि दरअसल सरकार ने आईएमएफ की उस शर्त को पूरा करने के लिए की है जिसके तहत बैंक ने सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये इकट्ठा करने को कहा था। सरकार ने बैंक की शर्तों के आगे अपने घुटने टेक दिए, जिसके बाद सरकार ने एक मिनी बजट पेश करते हुए यह कदम उठाया है। इसके तहत ही कई तरह के करों और तेल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई।
पाकिस्तान की जो हालत है और जो वहां के नेताओं के करतूत हैं उससे वहां के अर्थशास्त्री भी हैरान हैं। पाकिस्तान के अर्थशास्त्री डा. परवेज ताहिर ने सरकार से अपील की है कि यदि देश को बचाना है तो उसको अपनी झूठी अकड़ छोड़ कर भारत से व्यापार शुरू करना चाहिए। उनका कहना है कि भारत विश्व के कई देशों को गेहूं समेत कई दूसरी चीजों की सप्लाई कर रहा है, लिहाजा यदि सीधी बात की जाए तो पाकिस्तान को भी भारत गेहूं समेत दूसरी चीजें दे सकता है।
बता दें कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद से ही पाकिस्तान ने भारत से सभी तरह का व्यापार बंद कर दिया था। इसका सबसे अधिक नुकसान वहां के कपड़ा उद्योग को हुआ है। पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग सरकार से कई बार गुहार लगा चुका है कि वो भारत से कपास का आयात करे। हालांकि सरकार ने उनकी बातों को अनदेखा किया और उसकी ही बदौलत वहां पर कई कपड़ा उद्योग बंद हो गए हैं या बंद होने की कगार पर हैं। भारत से व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान को विदेशों के रास्ते भारतीय सामान पहुंच रहा है जो काफी महंगा पड़ रहा है।

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