पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्तों के सामने घुटने टेक दिए हैं। आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को 7 बिलियन डालर के कर्ज को लेकर पाकिस्तान को उनकी आर्थिक एवं वित्तीय नीतियों का ज्ञापन प्राप्त हो चुका है। इसकी जानकारी खुद पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने मीडिया को दी है। उन्होंने मीडिया को बताया है कि पाकिस्तान की तरफ से आईएमएफ की शर्तों को मान लिया गया है। इसका असर पाकिस्तान के शेयर बाजार पर भी हुआ है। कराची स्टाक एक्सचेंज में इस घोषणा के साथ ही सेंसेक्स 745 नीचे चला गया। जानकारों का कहना है कि बाजार इस वक्त काफी दबाव में है। यदि आईएमएफ ने जल्द ही कर्ज नहीं दिया तो ये गिरावट आगे भी जारी रहेगी। आपको बता दें कि इस कर्ज के लिए पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच नौ दौर की लंबी बातचीत चली थी। इस कर्ज को पाने के लिए पाकिस्तान काफी समय से लगा हुआ था।
डार ने कर्ज के बाबत जानकारी देते हुए ये भी साफ कर दिया है कि कर्ज के लिए जिन शर्तों पर पाकिस्तान ने हामी भरी है उनसे कुछ समस्याएं सामने जरूर आएंगी, लेकिन ये बदलाव बेहद जरूरी हैं। अब पहले दोनों पक्षों की तरफ से इस ज्ञापन पर साइन किए जाएंगे, फिर इसको फंड एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही इस कर्ज को पाकिस्तान को दिया जाएगा। आपको यहां पर ये भी बता दें कि इस कर्ज के ऐवज में देश की आम जनता पर बोझ बढ़ने वाला है। पहले से ही जरूरी चीजों की किल्लत का सामना कर रहे पाकिस्तान में इस कर्ज के बाद महंगाई एक बार फिर से रिकार्ड स्तर पर पहुंच जाएगी। पाकिस्तानी रुपया भी इन दिनों डालर के मुकाबले 280 रुपये तक जा पहुंचा है। पाकिस्तान ने जिन शर्तों पर अपनी हामी भरी है उनमें कर का दायरा बढ़ाकर 170 बिलियन करना, गैस और ऊर्जा क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म करना, गैस सेक्टर को कोई नया कर्ज न देना, पेट्रोल और डीजल पर लेवी को और ऊंचा कर 50 रुपये तक ले जाना, बीआईएसपी को बढ़ाकर 400 बिलियन डालर तक ले जाना शामिल है।
आईएमएफ की ये सभी शर्तें इस लिए बेहद खास हो गई हैं क्योंकि हाल ही में सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में जबरदस्त बढ़ोतरी की है। इस कर्ज के बाद इनकी कीमतें और अधिक हो जाएंगी। पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों का असर सब्जियों, दूध, फल समेत दूसरी चीजों पर भी जरूर ही दिखाई देगा। इस बीच देश की माली हालत पर सरकार और विपक्ष में जोरदार खींचतान जारी है। एक तरफ देश के पूर्व पीएम इमरान खान लगातार खराब होती हालत के लिए शहबाज शरीफ सरकार की गलत नीतियों को दोषी ठहरा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ सरकार इसके लिए इमरान खान को ही कटघरे में खड़ा कर रही है। सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि इमरान खान की सरकार ने देश को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया है। इसका खामियाजा जनता और सरकार को भुगतना पड़ रहा है।

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