कहां गायब हो गई गौरैया, हमारे बचपन की साथी!

'चूं-चूं करती आई चिड़िया, दाल का दाना लाई चिड़िया', गीत की इस पंक्ति के साथ ही छोटी सी चिड़िया जिसको हम गौरैया के नाम से जानते थे, बीते दिनों की याद बन गई है। अब ये गौरैया नहीं दिखाई देती, शायद इसलिए ही इस तरह के गीत भी अब नहीं लिखे जाते। गौरैया, जो कभी हमारे बचपन की हमजोली हुआ करती थी, कमरे में लगे फोटो के पीछे चाहे-अनचाहे तरीके से अपना घोंसला बनाती, उसमें अंडे देती, जब उन अंडों से उसके बच्चे निकलते तो कई बार जब हम चलना सीख रहे होते थे, तब वो उड़ना सीखते थे। जब हम अपने पैरों पर खड़े होकर चलना सीख जाते, तब वो बच्चे भी दूर आसमान में पंख फैलाए कहीं चले जाते थे। गौरैया, चाहे अनचाहे रूप से हमारे बचपन की हमजोली होती थी। लेकिन, अब यही गौरैया गायब है, या यूं कहें कि हमारी वजह से काफी हद तक दम तोड़ चुकी है। अब घरों में तो क्या पेड़ों पर भी इसका आशियाना दिखाई नहीं देता। हम लोगों ने विकास की अंधी दौड़ में इसके आशियाने के साथ-साथ इसके खाने को भी खत्म कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि अब यह गौरैया ही हमसे दूर हो गई। 

हो सकता है इसका हम पर कोई असर भी नहीं पड़ा हो, लेकिन यह जिस खतरे की आहट है, उसकी तरफ से यदि हम मुंह फेर लेंगे तो यह हम सभी के लिए खतरनाक होगा। कितनी विचित्र बात है कि जिस गौरैया के साथ हमारा बचपन बीता उसको हमारे ही बच्चों ने नहीं देखा और इस ओर हमारा कोई ध्यान भी नहीं गया। अपने इस जीवन में हमने केवल गौरैया को ही लुप्त होते नहीं देखा बल्कि गिद्ध समेत कई और पक्षियों को भी लुप्त होते देखा, लेकिन कभी इस बारे में सोचा नहीं। इसकी वजह केवल यही है कि हमारे मन में इन जीवों के लिए कोई आदर नहीं और हमने हमेशा ही इनकी मौजूदगी और इनकी विशेषताओं को नजरअंदाज किया है। खेतों में कीटनाशकों का अधिकतम उपयोग कर हमने कई छोटे जीवों को पैदा होने का मौका ही नहीं दिया, मोबाइल टावर से निकलती तरंग का भी इनपर विपरीत असर पड़ा है, जिसकी वजह से कई ऐसे पक्षी जो इनसे अपना पेट भरते थे, वो या तो खत्म हो गए या फिर खत्म होने की कगार पर हैं। घरों में अब न तो उनके लिए जगह है और न ही हम उतने संवेदनशील ही हैं कि उन्हें अपने घर में जगह दें। जाने-अनजाने हम इन्हें खत्म करते चले गए। 

जंगलों और घास के मैदानों का कम होना, पेड़ों की कटाई भी इसके कम होने का एक बड़ा कारण है। इनकी जगह अब कंकरीट के जंगलों ने ले ली है। लेकिन इन सभी के पीछे कहीं न कहीं केवल हम और हमारी सोच ही है। हिंदु मान्यताओं के अनुसार गौरैया का घर में आना और घोंसला बनाना शुभ माना जाता है, लेकिन अब यह शुभ संकेत गायब है। आपको हैरानी हो सकती है यह जानकर कि भूकंप का पता इन पक्षियों को पहले ही हो जाता है और इसका संकेत भी यह पहले ही देने लग जाते हैं। इसलिए इनका यूं गायब होना धरती पर मानवजाति के लिए खतरनाक संकेत है। गौरैया दिल्ली की राज पक्षी है।

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