रूस-चीन की जुगलबंदी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

रूस और चीन के बीच की नजदीकियों से पूरा विश्व कहीं न कहीं डरा हुआ दिखाई दे रहा है। दोनों देशों की नजदीकियों से आशंकित विश्व की चिंता इस बात को लेकर भी है कि कहीं इनकी जुगलबंती दुनिया को किसी गहरे अंधकार की तरफ न धकेल दे। पहले से ही इस बात की आशंका जताई जा रही है कि रूस तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है। ऐसे में दोनों देशों की तरफ से जिस तरह के बयान दिए जा रहे हैं वो भी इन आशंकाओं को बल ही दे रहे हैं। कहने को तो दोनों ही देश इन संबंधों को व्यापार से लेकर रणनीतिक तक का नाम दे रहे हैं, लेकिन इस जुगलबंदी का दायरा केवल यहीं तक सीमित दिखाई नहीं देता है। दरअसल, विश्व के कई देशों का मानना है कि रूस का साथ देने की चीन के पास दो बड़ी वजह हैं। इनमें से पहली वजह दोनों का अमेरिकी विरोध है तो दूसरी वजह चीन यह भी देखना चाहता है कि आखिर यूक्रेन से युद्ध का नतीजा क्या निकलता है और विश्व इस पूरे मसले पर क्या रुख अपनाता है। 

पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह से चीन और ताइवान के बीच के संबंध नाजुक दौर में पहुंचे हैं उसको देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि भविष्य में एशिया में युद्ध पर मंडरा रहे बादल हकीकत बन सकते हैं। बीते एक वर्ष में विश्व ने इसको करीब से देखा भी है। पिछले वर्ष जब अमेरिकी सीनेट की अध्यक्ष नैंसी पैलोसी ताइवान पहुंची थीं, उसके बाद करीब दो माह तक चीन ने ताइवान के इर्द-गिर्द समुद्र में टनों गोला-बारूद दागा था। यूं तो यह केवल एक चेवावनी भर था लेकिन इसके राजनीतिक मायने काफी अलग थे। ऐसे में यदि रूस यूक्रेन के किसी भी टुकड़े पर लंबे समय के लिए कब्जा करने में सफल हो जाता है तो ये चीन के लिए एक सुखद संदेश होगा। मौजूदा समय में दुनिया किसी भी सूरत से विश्व युद्ध का खतरा मोल नहीं लेना चाहती है। 

यूक्रेन युद्ध से भी इसका संकेत मिल चुका है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी है कि यदि भविष्य में चीन ने ताइवान पर सीधा सैन्य हमला बोला तो क्या विश्व के बड़े देश इसी तरह से दूर खड़े एकजुट दिखाई देंगे जैसे यूक्रेन में दिखाई दे रहे हैं या फिर मिलकर चीन से सामने के लिए आगे आएंगे। हालांकि इन दोनों ही सूरत में विश्व को नुकसान झेलना पड़ेगा। ताइवान-यूक्रेन और चीन-रूस की स्थिति कई सूरत से एक ही जैसी है। ऐसे में कई सवालों का उठना भी लाजमी है।   

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